उत्तराखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहे विवाद से जुड़े मामले में अहम सुनवाई हुई। गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में हुई।
सुनवाई के दौरान रेखा आर्या की ओर से आरोप लगाया गया कि गिरधारी लाल साहू उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें विभिन्न कंपनियों से हटाने के साथ ही उनके 80 प्रतिशत शेयर भी बेच दिए गए हैं। इससे उनके राजनीतिक करियर को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनकी ओर से अदालत से गिरधारी लाल साहू की याचिका खारिज करने की मांग की गई।
दूसरी ओर गिरधारी लाल साहू ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उनकी ओर से कहा गया कि न तो उन्होंने रेखा आर्या को कभी डराया-धमकाया और न ही कंपनियों से हटाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर किए। कंपनियों से उन्हें उनकी सहमति से हटाया गया था और आज भी उनके शेयर मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेखा आर्या के राजनीतिक जीवन को आगे बढ़ाने में उन्होंने हमेशा सहयोग किया है।
याचिका में गिरधारी लाल साहू ने दावा किया कि उनकी शादी वर्ष 2004 में हुई थी और पिछले 22 वर्षों से वे साथ रह रहे हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में उन्हें शादी के समय खुद को अविवाहित बताने, फर्जी हस्ताक्षर के जरिए कंपनियों के निदेशक पद से हटाने, जान से मारने की धमकी देने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने जैसे आरोपों में फंसाया गया है। उन्होंने इन सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है।
याचिकाकर्ता ने यह आरोप भी लगाया कि रेखा आर्या के मंत्री बनने के बाद करीब 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की गई। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक लगाने की भी गुहार लगाई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।



