उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) में निर्माणाधीन साइंस सिटी परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति परिसंवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए कहा कि देहरादून साइंस सिटी आने वाले समय में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए विज्ञान एवं अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साइंस सिटी में युवाओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उनके वैज्ञानिक विचारों और नवाचारों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने ‘विज्ञान सेतु’ पहल के तहत सामुदायिक विज्ञान रेडियो ‘विज्ञान वाणी’ (88.8 मेगाहर्ट्ज), ‘विज्ञान दृश्यम’ और ‘विज्ञान धारा’ का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि इन माध्यमों से वैज्ञानिक ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दौर तकनीकी परिवर्तन का है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर और बायो-टेक्नोलॉजी जैसी तकनीकें दुनिया की दिशा तय कर रही हैं। ऐसे में उत्तराखंड को इन क्षेत्रों में नेतृत्व करने के लिए युवाओं को बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की है, जिसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है। सरकार विज्ञान, अनुसंधान और तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतियों के साथ कई संभावनाएं भी रखती हैं। हिमालय, जैव विविधता, औषधीय वनस्पतियां और प्राकृतिक संसाधन राज्य की बड़ी ताकत हैं। वैज्ञानिक शोध और स्थानीय समाधान के माध्यम से उत्तराखंड को विकास का मॉडल बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, डिजिटल लाइब्रेरी, स्टेम लैब्स और आधुनिक तकनीकी प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यूकॉस्ट परिसर में स्टार्टअप सेंटर विकसित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की और पौधारोपण भी किया।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, सहसपुर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, सचिव नितेश झा, यूकॉस्ट महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालयों के कुलपति और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


