उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भाजपा के पूर्व विधायक के खिलाफ दर्ज चार मुकदमों में से दो मुकदमों में उन्हें फौरी राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने राज्य सरकार और मुकदमा दर्ज कराने वालों को चार हफ्ते के अंदर अपना पक्ष रखने का नोटिस जारी किया है।
मुकदमे हरिद्वार और देहरादून के विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज किए गए थे। इसमें आरोप लगाया गया था कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो और ऑडियो वायरल कर भाजपा उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम की छवि खराब की।
सुरेश राठौर की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उनके खिलाफ कोई दुष्प्रचार नहीं किया गया है और उन्हें गिरफ्तारी से रोक लगाई जाए तथा मुकदमे निरस्त किए जाएं। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने बहादराबाद (हरिद्वार) और डालनवाला (देहरादून) के दो मुकदमों में तुरंत राहत दी।
मामला अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा है, जिसमें अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा कुछ ऑडियो और वीडियो जारी किए गए थे, जिनमें दुष्यंत गौतम समेत अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। इसके बाद दुष्यंत गौतम, आरती गौड़, संचित कुमार और धर्मेंद्र कुमार ने अलग-अलग थानों में सुरेश राठौर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
सुरेश राठौर के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में कहा कि उर्मिला सनावर द्वारा जारी किए गए ऑडियो और वीडियो फर्जी हैं और उनका उनके साथ कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल दुष्यंत गौतम की छवि धूमिल करने के लिए रचा गया है।


