उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल आयुक्त दीपक रावत ने शनिवार को हल्द्वानी में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में भूमि विवाद, सोलर प्लांट, चिकित्सा, वाहन ऋण, भूमि कब्जा और अन्य जनहित से जुड़े मामलों की सुनवाई कर कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया।
जनसुनवाई के दौरान आयुक्त ने कहा कि दूरदराज क्षेत्रों से लोग छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं, जबकि बिजली-पानी की आपूर्ति, अतिक्रमण, कब्जा, बढ़े हुए बिल, प्लॉट विवाद और पुलिस शिकायत जैसे मामलों का निस्तारण चौकी, ब्लॉक और तहसील स्तर पर आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़ी शिकायतों का समाधान अपने स्तर पर समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करें।
कार्यक्रम में रामनगर निवासी बसंती देवी ने शिकायत की कि वर्ष 2021 में उनके घर पर लगाया गया सोलर प्लांट ठीक से कार्य नहीं कर रहा था और कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। मामले को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि को तलब किया और आपसी सहमति के आधार पर बसंती देवी को 58 हजार रुपये की धनराशि वापस दिलाई।
वहीं, हल्दूचौड़ की जानकी देवी ने प्लॉट के रास्ते को लेकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि प्लॉट खरीदते समय 28 फीट सरकारी मार्ग दर्शाया गया था, लेकिन रजिस्ट्री में रास्ता मात्र 16 फीट दर्ज किया गया। आयुक्त ने मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए पटवारी को निर्देशित किया।
हल्द्वानी निवासी हरीश चंद्र ने वाहन ऋण से जुड़ी समस्या रखते हुए बताया कि डंपर की दो किस्तें जमा न होने पर फाइनेंस कंपनी ने उनका वाहन जब्त कर लिया। जनसुनवाई में दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद समाधान निकाला गया और कंपनी ने नियमानुसार राहत देने का आश्वासन दिया।
इस दौरान एक पुराना मामला भी सामने आया, जिसमें नत्थू देवी की लापता पुत्री को खोजने के लिए आयुक्त ने पूर्व में पुलिस को निर्देश दिए थे। पुलिस ने युवती को सकुशल बरामद कर लिया, जिसके बाद नत्थू देवी ने आयुक्त का आभार व्यक्त किया।
इसके अलावा निजी अस्पताल में उपचार में लापरवाही, कॉलोनी में वायर फेंसिंग, रास्ता अवरुद्ध करने और भूमि संबंधी अन्य शिकायतों पर भी सुनवाई की गई। आयुक्त ने कहा कि कई मामलों में ऐसे भूखंडों की बिक्री की जा रही है जिन पर विक्रेता का वास्तविक कब्जा नहीं है, जबकि राजस्व कर्मियों द्वारा बिना मौके पर सत्यापन किए रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है। उन्होंने इस तरह की लापरवाही को गंभीर मानते हुए मंडल के सभी जिलाधिकारियों को जिम्मेदार राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।


