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बार-बार तबादले पर हाईकोर्ट सख्त…इस अफसर को मिली बड़ी राहत

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में तैनात मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रजनी रावत के प्रशासनिक आधार पर किए गए तबादले पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने 3 जुलाई 2026 के स्थानांतरण आदेश के साथ 7 और 20 जुलाई को जारी कार्यमुक्त आदेशों के क्रियान्वयन पर भी अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रजनी रावत स्वास्थ्य महानिदेशालय देहरादून में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात हैं। इससे पहले 13 फरवरी 2026 को उन्हें प्रशासनिक आधार पर जिला अस्पताल चमोली स्थानांतरित किया गया था। इस आदेश को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 25 फरवरी को कोर्ट ने स्थानांतरण आदेश निरस्त करते हुए विभाग को उनका पक्ष सुनकर नए सिरे से निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 24 मार्च को विभाग ने चमोली स्थानांतरण आदेश वापस ले लिया था।

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याचिका के अनुसार इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने 3 जुलाई को रजनी रावत का देहरादून से जिला अस्पताल हरिद्वार तबादला कर दिया। इसके बाद उन्हें 7 और 20 जुलाई को कार्यमुक्त करने के आदेश जारी किए गए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विभाग ने उनके अभ्यावेदनों पर निष्पक्ष विचार करने के बजाय पुराने आरोपों को दोहराते हुए दोबारा स्थानांतरण आदेश जारी किया, जो हाईकोर्ट के पूर्व आदेश की भावना के विपरीत है।

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याचिका में यह भी कहा गया कि रजनी रावत ने स्थानांतरण से जुड़े दस्तावेज आरटीआई के तहत मांगे थे, लेकिन विभाग ने संबंधित सूचना उपलब्ध नहीं होने की बात कही। उनके अनुसार स्थानांतरण प्रक्रिया में उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 18(4) का पालन नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि रजनी रावत को समिति की बैठक की मौखिक सूचना दी गई थी, लेकिन उन्होंने सुनवाई में सहयोग नहीं किया। इस पर खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिससे यह साबित हो कि उन्हें समिति के समक्ष उपस्थित होने की तारीख की विधिवत सूचना दी गई थी। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि पूर्व में इसी आधार पर 13 फरवरी का स्थानांतरण आदेश निरस्त किया जा चुका है।

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याचिका के मुताबिक रजनी रावत ने 6 और 7 जुलाई को विस्तृत प्रत्यावेदन भी दिए थे। उनकी सास ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल को पत्र भेजकर तबादला निरस्त करने का अनुरोध किया था। मंत्री कार्यालय ने उचित सुनवाई कर निर्णय लेने के निर्देश दिए, लेकिन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

मामले को प्रथम दृष्टया विचारणीय मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही 3 जुलाई के स्थानांतरण आदेश और 7 व 20 जुलाई के कार्यमुक्त आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है।

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हिल दर्पण डेस्क

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