हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद कथित मंच ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उत्तराखंड से निकलकर कर्नाटक तक पहुंच गया है। 8 अगस्त को खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। इसके तीन दिन बाद 11 अगस्त को उसी स्थान पर कथित तौर पर हवन-पूजन के जरिए मंच का ‘शुद्धिकरण’ किए जाने की बात सामने आई। कांग्रेस ने इस घटना को दलित समाज और मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान से जोड़ते हुए बीजेपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विवाद बढ़ने के बाद बेंगलुरु के विधान सौधा थाने में उत्तराखंड बीजेपी के कई नेताओं के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। यह शिकायत आदिवासी कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष टीआर रामप्पा की ओर से दी गई थी। शिकायत में संरक्षण नागरिक अधिकार अधिनियम, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि मंच के कथित शुद्धिकरण की घटना छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता को दर्शाती है। खुद मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। खड़गे ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए बीजेपी पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस का कहना है कि जिस मंच से देश की एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सभा को संबोधित किया, उसके बाद कथित तौर पर शुद्धिकरण किया जाना दलित सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला है।
वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने पूरे विवाद को ‘बांटने की राजनीति’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड जैसे शांत और सामाजिक समरसता वाले राज्य में जातिगत राजनीति का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। भट्ट का दावा है कि जिस समय कथित शुद्धिकरण हुआ, उस दौरान मौके पर बीजेपी का कोई कार्यकर्ता मौजूद नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस मामले में गुमराह किया है।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस मुद्दाविहीन है और अब ऐसे विषयों को राजनीतिक रंग दे रही है, जिससे समाज में विभाजन पैदा हो। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड में लंबे समय से जाति के आधार पर राजनीति का प्रभाव नहीं रहा है और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों पर बीजेपी लगातार जीत दर्ज करती रही है।
इस बीच विवाद ने एक और कानूनी मोड़ ले लिया है। हल्द्वानी में श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी गई थी। शिकायतकर्ताओं विनोद कुमार आर्य और अमित कुमार ने राहुल गांधी पर कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया। तहरीर के आधार पर हल्द्वानी कोतवाली में BNS की धारा 196 और 299 के साथ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(Q) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
इस तरह हल्द्वानी का कथित मंच ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। कांग्रेस इसे दलित सम्मान, सामाजिक समानता और छुआछूत का मुद्दा बता रही है, जबकि बीजेपी इसे कांग्रेस की विभाजनकारी राजनीति करार दे रही है। मामले को लेकर दोनों दलों के बीच सियासी टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।


