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हल्द्वानी एसिड अटैक केस… दोषियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में हल्द्वानी के इंदिरा नगर में हुए चर्चित एसिड अटैक मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषी मां-बेटे समेत तीन आरोपियों की उम्रकैद की सजा को कायम रखा है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आरोपियों का कृत्य बेहद जघन्य था और ऐसे मामले में सजा में रियायत या माफी की गुंजाइश नहीं है।

मामला वर्ष 2014 का है, जब पड़ोस में रहने वाले इरशाद और उनके परिवार के साथ विवाद के बाद मोहम्मद जैकी, उसकी मां रहमत जहां और एक नाबालिग ने कथित तौर पर तेजाब से भरी बोतलें फेंक दी थीं। हमले में कुल 19 लोग प्रभावित हुए थे। इनमें पांच लड़कियों के साथ 18 माह का एक मासूम बच्चा भी शामिल था।

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मेडिकल जांच के दौरान दो चिकित्सकों ने अदालत में बताया था कि हमले में घायल पांच लोगों के शरीर पर पड़े घाव और निशान स्थायी प्रकृति के हैं और उनके पूरी तरह ठीक होने की संभावना नहीं है।

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सत्र अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को पेश किया। इन साक्ष्यों के आधार पर वर्ष 2018 में अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

इसके बाद दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दावा किया कि वे करीब 12 वर्षों से जेल में हैं और पर्याप्त सजा भुगत चुके हैं। उन्होंने अदालत से रिहाई की मांग की। हालांकि, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता दीप चंद्र जोशी ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि हमले में एक मासूम बच्चे समेत कई लोगों की जिंदगी पर स्थायी असर पड़ा और ऐसे जघन्य अपराध के दोषियों को सजा में छूट नहीं दी जानी चाहिए।

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हाईकोर्ट ने पीड़ित पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए दोषियों की अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए तीनों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी।

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हिल दर्पण डेस्क

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