उत्तराखंड के बहुचर्चित किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में हाईकोर्ट ने आईटीआई थाने के तत्कालीन प्रभारी कुंदन सिंह रौतेला को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद कुंदन सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर और दाखिल चार्जशीट को निरस्त कर दिया।
मामले में आरोप था कि तत्कालीन थाना प्रभारी ने सुखवंत सिंह के साथ दुर्व्यवहार किया और उससे पांच लाख रुपये लिए थे। इसके बाद सुखवंत ने काठगोदाम स्थित एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि प्रॉपर्टी डील के मामले में चार करोड़ रुपये से अधिक की रकम लेने के बावजूद डीलरों ने न तो रजिस्ट्री कराई और न ही पैसे लौटाए। शिकायत लेकर थाने पहुंचने पर दुर्व्यवहार और रुपये दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये लेने का भी आरोप लगाया गया था।
जांच के बाद पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी कुंदन सिंह रौतेला समेत 12 लोगों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 108, 351(2) और 352 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित करने के लिए महज उत्पीड़न या आरोप पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए आरोपी की ओर से आत्महत्या के लिए उकसाने वाला स्पष्ट कृत्य, मानसिक मंशा और आत्महत्या के समय के आसपास ऐसा कृत्य होना जरूरी है।
अदालत ने पाया कि कुंदन सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने या धमकी देने का कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। जांच में पांच लाख रुपये लेने के आरोप की भी पुष्टि नहीं हुई और रकम को केस प्रॉपर्टी भी नहीं बनाया गया था। अदालत ने इन्हीं आधारों पर कुंदन सिंह के खिलाफ एफआईआर और चार्जशीट रद्द कर दी। मामले में शामिल अन्य आरोपियों को मुकदमे का सामना करना होगा।


