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हॉर्मुज तनाव का असर…क्या अब छोटा होगा आपका LPG सिलेंडर?

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मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब भारत के आम घरों तक महसूस किया जा रहा है। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। आयात पर निर्भर भारत इस समय गैस आपूर्ति के गंभीर संकट का सामना कर रहा है।

स्थिति को संभालने के लिए सरकार एक अहम कदम पर विचार कर रही है—घरेलू गैस सिलेंडर के वजन में कटौती। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा 14.2 किलो के सिलेंडर को घटाकर 10 किलो करने का प्रस्ताव सामने आया है। इसका उद्देश्य सीमित गैस स्टॉक के बावजूद अधिक से अधिक घरों तक आपूर्ति सुनिश्चित करना है। यदि यह लागू होता है, तो सिलेंडर की कीमत भी उसी अनुपात में कम की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ न पड़े। नए सिलेंडरों को अलग पहचान देने के लिए विशेष स्टिकर या अलग रंग की सील का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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इस संकट की जड़ हॉर्मुज जलडमरूमध्य है, जो भारत के लिए गैस आयात का मुख्य मार्ग है। मौजूदा हालात के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में गैस की आपूर्ति तेजी से घट रही है और स्टॉक चिंताजनक स्तर तक पहुंच रहा है।

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आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कुछ सख्त कदम भी उठाए हैं। अब गैस सिलेंडर की दो बुकिंग के बीच का अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इसके साथ ही कीमतों में हाल ही में ₹60 की बढ़ोतरी की गई है और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कमर्शियल उपयोग को सीमित किया जा रहा है।

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हालांकि, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि अचानक बदलाव से लोगों में भ्रम और नाराजगी पैदा हो सकती है, खासकर चुनावी माहौल वाले राज्यों में। साथ ही, बॉटलिंग प्लांट्स में तकनीकी बदलाव भी एक बड़ी चुनौती है। सरकार का फिलहाल मुख्य लक्ष्य किसी भी कीमत पर गैस की पूरी तरह कमी (ड्राई-आउट) की स्थिति से बचना है। आने वाले दिन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

हिल दर्पण डेस्क

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