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ड्रोन, 200 कैमरे और हाईटेक एसओएस सेंटर…केदारनाथ धाम में अब हर कदम पर नजर!

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उत्तराखंड में केदारनाथ धाम यात्रा की तैयारियां इस बार हाईटैक अंदाज में की जा रही हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और मॉनिटरिंग के लिए कई आधुनिक तकनीकों को लागू किया है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिल सके।

जिला प्रशासन और पुलिस ने रुद्रप्रयाग से लेकर केदारनाथ धाम तक लगभग 200 हाई रेज़ोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इनमें से 181 कैमरे सक्रिय हैं और यात्रा मार्ग, मुख्य बाजार, संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र और हेलीपैड तक हर गतिविधि की निगरानी कर रहे हैं।

यदि गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग की बात करें, तो यहां 16 कैमरे लगाए गए हैं, साथ ही कुल 14 एसओएस प्वाइंट स्थापित किए गए हैं। इनमें से 5 सेंटर गौरीकुंड, जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचोली और रुद्रा प्वाइंट पर हैं, जबकि रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक 11 एसओएस सेंटर बनाए गए हैं। ये सेंटर नेटवर्क न होने पर भी जिला मुख्यालय स्थित आपदा कंट्रोल रूम से सीधे संपर्क की सुविधा देते हैं, जिससे वास्तविक समय में लोकेशन ट्रेस कर राहत और बचाव कार्य तेज़ी से किया जा सकता है।

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इस बार 5 ड्रोन कैमरे भी यात्रा मार्ग की निगरानी के लिए तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा यात्रा में उपयोग होने वाले लगभग 5,000 घोड़ा-खच्चरों पर बारकोड, टोकन और चिप लगाई जा रही है, जिससे उनकी गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखी जा सके।

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केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन के लिए भी ये हाईटेक कैमरे उपयोग में लाए जाएंगे। पुलिस इन कैमरों के जरिए जाम और भीड़ की स्थिति पर नजर रखते हुए तुरंत निर्णय ले सकेगी।

गौरीकुंड, सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ धाम तक इस बार 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, जो सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद रहेंगे।

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चारधाम यात्रा के दौरान जिला आपदा कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहेगा, जहां पांच कर्मी किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैनात रहेंगे।

आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया, “पूरे यात्रा रूट पर चौबीसों घंटे कैमरों के जरिए नजर रखी जा रही है और कंट्रोल रूम पूरी तरह सक्रिय है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव मिल सके।”

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हिल दर्पण डेस्क

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