उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों गरमाई हुई है। हाल ही में कई नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से सियासी हलचल तेज हो गई है और बयानबाजी का दौर जारी है। इसी बीच एक और बड़े राजनीतिक उलटफेर की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की नाराजगी के बाद पार्टी हाईकमान को झुकना पड़ा है।
दरअसल, 20 मार्च को उत्तराखंड कैबिनेट का विस्तार हुआ था, जिसमें पांच नए मंत्रियों को शामिल किया गया। इसके कुछ दिन बाद, 28 मार्च को कांग्रेस ने दिल्ली में उत्तराखंड के छह नेताओं को पार्टी में शामिल कराया। कांग्रेस का दावा था कि उसने बीजेपी में बड़ी सेंध लगाई है। इस दौरान कुमारी शैलजा ने भी कहा कि बीजेपी को इस राजनीतिक गतिविधि की भनक लग गई थी, इसलिए उसने जल्दबाजी में मंत्रिमंडल विस्तार किया।
लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। 28 मार्च से एक दिन पहले ही हरीश रावत ने 15 दिन के “राजनीतिक अवकाश” की घोषणा कर दी। शुरुआत में इसे सामान्य बयान माना गया, लेकिन जब उन्होंने इस दौरान जनसंपर्क और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने की बात कही, तो राजनीतिक हलकों में इसके अलग मायने निकाले जाने लगे।
मामले की तह में जाने पर पता चला कि हरीश रावत रामनगर के ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी को कांग्रेस में शामिल कराना चाहते थे। हालांकि, पार्टी के ही एक स्थानीय वरिष्ठ नेता ने उनकी एंट्री का विरोध कर दिया। बताया जाता है कि उस समय पार्टी हाईकमान ने हरीश रावत की बजाय विरोध करने वाले नेता की बात को तरजीह दी, जिसके चलते 28 मार्च को संजय नेगी कांग्रेस में शामिल नहीं हो सके।
इससे नाराज होकर हरीश रावत ने राजनीतिक अवकाश का ऐलान किया, जिसे उनकी नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा गया। इसके बाद पार्टी के भीतर हलचल बढ़ गई। अब खबरें सामने आ रही हैं कि हाईकमान ने रावत की मांग को मान लिया है और जल्द ही संजय नेगी की कांग्रेस में एंट्री हो सकती है।
इस बीच एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें संजय नेगी अपने समर्थकों के साथ बैठे नजर आ रहे हैं। बातचीत के दौरान वे खुद यह कहते सुने जा रहे हैं कि वे जल्द ही कांग्रेस ज्वाइन करेंगे और यह ज्वाइनिंग दिल्ली में हो सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं और उनकी नाराजगी को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए आसान नहीं है। उनके पास केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर काम करने का अनुभव है, जिससे उनकी बात सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि संजय नेगी कब कांग्रेस का दामन थामते हैं। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ज्वाइनिंग हरीश रावत के घोषित राजनीतिक अवकाश के दौरान होती है या उसके बाद, और अगर इसमें देरी होती है तो रावत आगे क्या कदम उठाते हैं।


