नई दिल्ली। गोवा विधानसभा में कांग्रेस के आठ विधायकों के भाजपा में शामिल होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम सुनवाई करते हुए याचिका पर विचार करने की सहमति जताई। यह याचिका गोवा विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें कांग्रेस की ओर से दायर अयोग्यता याचिका को खारिज कर दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कांग्रेस नेता गिरीश चोडांकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि पार्टी के चुनाव चिह्न पर निर्वाचित 11 में से आठ विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी विधायक दल के दो-तिहाई सदस्य दूसरी पार्टी में विलय करते हैं तो इसे वैध राजनीतिक विलय माना जाता है।
गोवा विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी पूछा कि क्या इस मामले में विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्णयों में कोई मतभेद है।
गौरतलब है कि 2022 में कांग्रेस के आठ विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद गोवा विधानसभा में भाजपा नीत एनडीए का संख्या बल बढ़कर 33 हो गया, जबकि कांग्रेस के पास केवल तीन विधायक रह गए।
उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की याचिका पर सीधे सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देने का निर्देश दिया था। अब एक बार फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।


