उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। वर्ष 2016 के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा मामले में ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तत्कालीन पीए और ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के ठिकाने पर छापेमारी की। कार्रवाई में करीब 1.32 करोड़ रुपये की संपत्ति मिलने के बाद कांग्रेस ने इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
ईडी ने 10 सितंबर को जीना के ठिकाने पर कार्रवाई की। जांच एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान 32 लाख रुपये नकद, सोना, महंगी घड़ियां और अन्य सामान बरामद हुआ। एजेंसी अब बरामद संपत्ति और नकदी के स्रोत की जांच कर रही है।
VPDO परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप
यह कार्रवाई वर्ष 2016 में हुई VPDO भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। ईडी के अनुसार, तत्कालीन UKSSSC सचिव के कार्यकाल में परीक्षा की ओएमआर शीट से कथित छेड़छाड़ की गई। आरोप है कि सुरक्षित अभिरक्षा में रखी ओएमआर शीट को तत्कालीन सचिव के निजी आवास तक पहुंचाया गया। इसके बाद कुछ खाली रोल नंबर वाली ओएमआर शीट निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को दिए जाने और उनमें प्रविष्टियां भरने के बाद दोबारा सील किए जाने की बात सामने आई है।
वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मामले का संज्ञान लेते हुए परीक्षा निरस्त कर जांच के आदेश दिए थे। करीब एक दशक बाद ईडी की कार्रवाई से यह पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
कांग्रेस ने पूछा- दस साल बाद कार्रवाई क्यों?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वर्ष 2016 में ही तत्कालीन सरकार ने परीक्षा निरस्त कर जांच शुरू करा दी थी, तो करीब दस साल बाद इस मामले में कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले कार्रवाई के जरिए कांग्रेस नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
गोदियाल ने हरीश रावत के कांग्रेस से इस्तीफा देने की चर्चाओं को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि रावत ने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है और कांग्रेस के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है।
करन माहरा बोले- कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल
पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने भी कार्रवाई को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के मामले की जांच पहले ही हो चुकी थी। ऐसे में दस साल बाद इसे फिर से उठाए जाने की टाइमिंग महत्वपूर्ण है। उन्होंने बरामद नकदी और संपत्ति के स्रोत की जांच तथ्यों के आधार पर किए जाने की बात कही।
माहरा ने आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई का मकसद हरीश रावत पर दबाव बनाना और आगामी विधानसभा चुनाव को प्रभावित करना है। उन्होंने कहा कि हरीश रावत दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं।
रावत समर्थकों ने भी जताई नाराजगी
रामनगर के ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी ने भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हरीश रावत कांग्रेस के महत्वपूर्ण नेताओं में हैं और चुनाव से पहले उनके करीबियों के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।
ईडी की कार्रवाई के बाद उत्तराखंड में कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर एजेंसी कथित परीक्षा अनियमितताओं और बरामद संपत्ति से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है, वहीं कांग्रेस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर हमलावर है। चुनावी साल में यह मामला आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सियासत में और गर्मी बढ़ा सकता है।


