अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद युद्ध की स्थितियां दिनों-दिन बिगड़ती जा रही हैं। इसी बीच कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के नेता सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया। पवन खेड़ा ने कहा कि शोक प्रस्ताव में उन्होंने और खुर्शीद ने कांग्रेस पार्टी की तरफ से ईरान के लोगों के लिए संदेश लिखा। उन्होंने कहा, “इस कुर्बानी को बर्बाद नहीं होने देना चाहिए। हमें इस घटना से सीख लेनी चाहिए और इसे हमेशा याद रखना चाहिए। रजमान के बीच और 10वें रोजे पर भूखे-प्यासे एक रहनुमा की हत्या हुई, यह बात आने वाली पीढ़ियों के लिए स्मरणीय रहेगी।”
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इज़राइल ने तेहरान पर संयुक्त हवाई हमले किए। 86 वर्षीय खामेनेई अपने तेहरान स्थित कंपाउंड में थे, जिसमें उनके कार्यालय और आसपास के इलाके निशाना बने। ईरानी राज्य मीडिया ने 1 मार्च को उनकी मौत की पुष्टि की और उन्हें शहीद घोषित किया। इस हमले में उनके परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए, जिससे ईरान में गहरा शोक फैल गया। ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया और कई शहरों में स्मृति सभाएं आयोजित की गईं।
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर थे और लगभग चार दशकों तक देश की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। उनकी मौत ने ईरान की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ ला दिया, क्योंकि सुप्रीम लीडर का पद इस्लामी क्रांति के बाद से अत्यंत शक्तिशाली माना जाता रहा है। हमले के बाद तेहरान में विरोध प्रदर्शन और जश्न दोनों देखे गए। कई युवा और विरोधी सड़कों पर खुशी जाहिर कर रहे थे, जबकि शिया समुदाय और समर्थक गहरे शोक में डूबे थे।
खामेनेई के उत्तराधिकार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उनके बेटे को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव ईरान की आंतरिक स्थिरता और क्षेत्रीय संघर्षों को प्रभावित कर सकता है।
खामेनेई की मौत ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। अमेरिका और इज़राइल के हमलों को ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और प्रॉक्सी युद्धों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है। दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं विभाजित हैं—कुछ देशों में शोक मनाया जा रहा है, जबकि कई जगहों पर इसे बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अब ईरान अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां नया नेतृत्व चुनना और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।


