उत्तराखंड में शिक्षकों के अनुरोध आधारित तबादलों को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब गंभीर बीमारी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों के लिए 1 जनवरी 2025 या उसके बाद जारी चिकित्सा प्रमाण-पत्र ही मान्य होगा। इससे पहले जारी मेडिकल प्रमाण-पत्रों के आधार पर किए गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद कुमार सिमल्टी ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि अनुरोध आधारित स्थानांतरण के लिए केवल नवीन चिकित्सा प्रमाण-पत्रों पर ही विचार किया जाएगा। विभाग के इस निर्णय से ऐसे कई शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जो वर्षों पुराने मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर तबादले की उम्मीद लगाए हुए थे।
शिक्षा विभाग ने अनुरोध आधारित स्थानांतरण के लिए 17 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित किए थे। अब विभाग उन्हीं प्रकरणों पर विचार करेगा, जिनमें निर्धारित तिथि के अनुरूप जारी चिकित्सा प्रमाण-पत्र संलग्न होगा। वर्ष 2022 अथवा उससे पहले जारी मेडिकल प्रमाण-पत्रों के साथ किए गए आवेदन मान्य नहीं होंगे।
विभाग का कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों ने पुराने चिकित्सा प्रमाण-पत्रों के आधार पर स्थानांतरण का अनुरोध किया है। ऐसे सभी आवेदकों को अब नया मेडिकल प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा, तभी उनके आवेदन पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 में गंभीर बीमारी और विशेष चिकित्सकीय परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों को अनुरोध आधारित स्थानांतरण और प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद धारा-27 के तहत आवेदन करने वाले कई गंभीर रोगग्रस्त शिक्षकों के तबादले लंबे समय से लंबित पड़े हैं।
ऐसे शिक्षक इलाज, पारिवारिक जिम्मेदारियों और कार्यस्थल की परेशानियों के बीच वर्षों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन विभाग की नई व्यवस्था के चलते अब उन्हें दोबारा अद्यतन चिकित्सा प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यदि निर्धारित समय के भीतर नया प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया तो आवेदन तकनीकी आधार पर निरस्त किए जा सकते हैं।
शिक्षकों का कहना है कि इस नई शर्त से कई वास्तविक और गंभीर रूप से बीमार शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। वहीं, शिक्षा विभाग का तर्क है कि वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का प्रमाण सुनिश्चित करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से अद्यतन चिकित्सा प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया गया है।


