उत्तराखंड में मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के तहत आपदा प्रबंधन तंत्र को और मजबूत बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है।
इसी क्रम में मंगलवार को सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य स्तरीय मानसून पूर्व टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा करना, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और राहत-बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना था।
इस पूर्वाभ्यास में नैनीताल जिले से अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल सहित आईआरएस (Incident Response System) से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में जिले में आपदा प्रबंधन की तैयारियों का आकलन किया गया और समन्वय को और बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही 2 जुलाई को नैनीताल जिले में मानसून पूर्व मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें भूस्खलन और बाढ़ जैसी संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों का परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए नैनीताल, कालाढूंगी, बेतालघाट, लालकुआं और धारी सहित पांच संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि गोलापार स्टेडियम, बेतालघाट, कालाढूंगी स्थित निहाल नाला, लालकुआं का गोला नदी क्षेत्र और नैनीताल के आल्मा कॉटेज जैसे स्थानों पर विशेष सतर्कता और तैयारियों की जरूरत होगी।
अधिकारियों ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान सभी विभागों की कार्यप्रणाली, संसाधनों का उपयोग, त्वरित प्रतिक्रिया और सूचना आदान-प्रदान की व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा। साथ ही विभागवार जिम्मेदारियों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य समय पर और प्रभावी तरीके से हो सकें।
अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत और संगठित प्रतिक्रिया दी जा सके। बैठक में पुलिस, लोनिवि, जल संस्थान, जिला प्रशासन, एसडीआरएफ समेत कई विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए और तैयारियों की समीक्षा में भाग लिया।


