उत्तराखंड में बदलते मौसम ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में खतरे की स्थिति पैदा कर दी है। पिछले 72 घंटों में मौसम के अचानक बदले मिजाज के चलते अब हिमस्खलन (एवलॉन्च) का जोखिम बढ़ गया है। डिफेंस जियो इन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (DGRE) ने राज्य के तीन संवेदनशील जिलों—उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़—के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर लोगों और प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
इन तीनों जिलों को डेंजर लेवल-3 में रखा गया है, जो मध्यम से उच्च जोखिम की श्रेणी में आता है। यह अलर्ट 21 मार्च से 22 मार्च तक प्रभावी रहेगा। खास तौर पर उन इलाकों में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है, जहां पहले भी हिमस्खलन की घटनाएं हो चुकी हैं। दरअसल, उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में पिछले कुछ दिनों से मौसम लगातार बदल रहा है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है। नई बर्फ की परत और पुरानी जमी बर्फ के बीच संतुलन बिगड़ने से हिमस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए DGRE ने समय रहते यह चेतावनी जारी की है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
एडवाइजरी के तहत प्रशासन को दिन-रात बर्फबारी की स्थिति पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, खासकर उन इलाकों में जहां पहले हिमस्खलन हो चुका है। आम लोगों के लिए भी कई जरूरी सावधानियां बताई गई हैं। बर्फीले क्षेत्रों में रहने वालों को अनावश्यक आवाजाही से बचने और जरूरी न होने पर घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो पूरी सतर्कता के साथ यात्रा करने को कहा गया है।
इसके अलावा लोगों को अपने घरों और गौशालाओं की छतों पर जमा बर्फ को समय-समय पर हटाने की सलाह दी गई है, क्योंकि अधिक बर्फ का भार हादसों का कारण बन सकता है। बर्फीले रास्तों पर फिसलन के खतरे को देखते हुए भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। प्रशासन ने 2700 मीटर से अधिक ऊंचाई पर रहने वालों को अगले एक-दो दिनों के लिए निचले इलाकों में जाने की सलाह दी है, ताकि जोखिम कम किया जा सके। वहीं ट्रेकर्स, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को पुराने एवलॉन्च जोन से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में दोबारा हिमस्खलन की संभावना अधिक रहती है।


