उत्तराखंड पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित ‘मगध साइबर गैंग’ का भंडाफोड़ किया है। हरिद्वार की श्यामपुर थाना पुलिस ने गैंग से जुड़े पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के कब्जे से बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं। प्रारंभिक जांच में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिले हैं।
पुलिस के अनुसार, यह गैंग बिहार के नालंदा और नवादा से जुड़ा हुआ है। आरोपित कथित तौर पर स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम लेकर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए करते थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
पुलिस कप्तान नवनीत सिंह ने बताया कि श्यामपुर क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस टीम ने एक स्विफ्ट कार को रोककर तलाशी ली। कार में पांच लोग सवार थे। तलाशी के दौरान एक बैग से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, सिम कार्ड और डिजिटल उपकरण बरामद होने पर पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की।
पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में सामने आया कि आरोपित स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम हासिल करते थे। इन खातों का एटीएम पिन और यूपीआई आईडी अपने नियंत्रण में लेकर कथित साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी। इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में यूपीआई के जरिए ट्रांसफर किया जाता और एटीएम या सीडीएम से नकदी निकाल ली जाती थी। निकाली गई रकम को कमीशन के आधार पर बांटने की बात भी सामने आई है।
श्यामपुर थाना प्रभारी नितेश शर्मा की जांच में बिहार के नालंदा और नवादा से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका के संकेत मिले हैं। पुलिस अब खाताधारकों, म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वालों और इस नेटवर्क के मुख्य संचालकों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान कृष्णा पाण्डे निवासी नालंदा बिहार, निरंजन कुमार और चन्द्रमणि कुमार निवासी नवादा बिहार तथा सन्नी और चन्दन पाण्डे निवासी हरिद्वार के रूप में हुई है।
बरामद 14 बैंक पासबुक में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, एसबीआई, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन बैंक और नैनीताल बैंक समेत कई बैंकों के खाते मिले हैं। वहीं बरामद एटीएम कार्ड भी विभिन्न बैंकों के हैं। पुलिस इन खातों में हुए लेन-देन और संदिग्ध रकम के स्रोत की जांच कर रही है।
मोबाइल फोन और लैपटॉप की प्रारंभिक जांच में व्हाट्सऐप चैट, बैंक खाता नंबर, खाताधारकों के नाम, क्यूआर कोड और लेन-देन से जुड़ी बातचीत मिली है। मोबाइल गैलरी में कई बैंक पासबुक और खातों से संबंधित दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिली हैं। पुलिस अब बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जांच के जरिए पूरे नेटवर्क की मनी ट्रेल खंगाल रही है।


