उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शिक्षकों के वार्षिक तबादलों से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। याचिका में मध्य सत्र में शिक्षकों के तबादलों से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक निवासी जीवन सिंह ने याचिका दायर कर कहा है कि वार्षिक तबादलों की प्रक्रिया के तहत मध्य सत्र में दूरस्थ क्षेत्रों से शिक्षकों को सुगम क्षेत्रों में भेजने से वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। याचिका में उत्तराखंड वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 का हवाला देते हुए कहा गया है कि शिक्षकों के वार्षिक तबादलों की प्रक्रिया निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार पूरी की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात कई शिक्षकों ने सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरण के विकल्प दिए हैं। यदि इन शिक्षकों को स्थानांतरित किया जाता है और उनके स्थान पर वैकल्पिक या पारस्परिक व्यवस्था नहीं की गई तो पहले से कमजोर दूरस्थ स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने इस मामले में सरकार से निर्देश लेने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 7 सितंबर को तय की।
8 एमबीबीएस डॉक्टरों के वेतन पर भी राहत: एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने नेशनल हेल्थ मिशन के तहत देहरादून और हरिद्वार के अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में सेवाएं दे चुके आठ एमबीबीएस डॉक्टरों के बकाया वेतन को लेकर राहत दी है। अदालत ने नगर आयुक्त देहरादून को निर्देश दिए कि डॉक्टरों के बकाया वेतन का 75 प्रतिशत 10 दिन के भीतर और शेष 25 प्रतिशत चार सप्ताह के भीतर जारी किया जाए।
यह मामला डॉ. ऋषि मुद्गल समेत आठ डॉक्टरों की याचिका से जुड़ा था। डॉक्टरों का आरोप था कि मार्च के बाद उनका वेतन रोक दिया गया, जिसके चलते आर्थिक परेशानियों के कारण कई डॉक्टरों को नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बावजूद अप्रैल से अगस्त तक का वेतन लंबित रहा। अदालत ने डॉक्टरों को आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया और मामले का निस्तारण कर दिया।


