उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी के लक्ष्य के साथ भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियों को नई दिशा देते हुए पहली बार राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर अलग-अलग कोर कमेटियों का गठन किया है। माना जा रहा है कि ये कमेटियां न केवल संगठन की चुनावी रणनीति को धार देंगी, बल्कि टिकट वितरण में भी निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
भाजपा ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रकोष्ठों के गठन और प्रबुद्ध सम्मेलन जैसे अभियानों को गति दी है। इसी कड़ी में गठित विधानसभा स्तरीय कोर कमेटियों में सांसद, प्रदेश पदाधिकारी, मोर्चा पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष, मेयर, नगर निकाय अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष और मंडल अध्यक्षों को शामिल किया गया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ये कमेटियां चुनाव तक अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन, जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और संगठनात्मक सक्रियता पर पैनी नजर रखेंगी। साथ ही संभावित दावेदारों की राजनीतिक पकड़, जनाधार और चुनाव जीतने की क्षमता का भी आकलन किया जाएगा।
कोर कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर संभावित उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। ऐसे में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में इन कमेटियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भाजपा नेतृत्व ने अपने विधायकों को स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि टिकट की दावेदारी केवल पद के आधार पर तय नहीं होगी। जनता से किए गए वादों को पूरा करने, क्षेत्र में सक्रिय रहने और जनसमस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देनी होगी। जिन क्षेत्रों में जनता की नाराजगी या विधायकों की कमजोर पकड़ सामने आएगी, वहां संगठन नए और अधिक प्रभावी चेहरों पर दांव लगा सकता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा की कोर कमेटी स्थानीय मुद्दों, बूथ प्रबंधन और केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि संगठन का यह नया प्रयोग पार्टी की चुनावी तैयारियों को और मजबूत करेगा तथा 2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होगा।


