हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट का 24 फरवरी को पारित आदेश सार्वजनिक हो गया है। आदेश की प्रति वेबसाइट पर अपलोड होने के बाद मामले से जुड़े पुनर्वास और बेदखली की प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ हो गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बताया गया कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास करीब 30.040 हेक्टेयर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर लगभग 4,365 मकान बनाए गए हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। रेलवे ने नई लाइन और अन्य परियोजनाओं के लिए करीब 30.65 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता जताई है। कोर्ट ने माना कि यह भूमि परियोजना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अदालत को यह भी बताया गया कि 13 परिवारों के पास छोटे भूखंडों का वैध स्वामित्व है। यदि उनकी जमीन परियोजना के दायरे में आती है तो नियमानुसार अधिग्रहण किया जाएगा। हालांकि, बाकी निवासियों को अतिक्रमणकारी मानते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें उसी स्थान पर पुनर्वास का अधिकार नहीं है।
केंद्र और रेलवे की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि प्रभावित परिवारों को संरचना हटाने के लिए छह माह तक प्रति परिवार 2,000 रुपये प्रतिमाह अनुग्रह राशि दी जाएगी। यह राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देंगी।
साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आने वाले परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन करने का अवसर दिया जाए। इसके लिए उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (USLSA) 19 मार्च 2026 के बाद क्षेत्र में पुनर्वास शिविर लगाएगा। इन शिविरों में परिवारों को योजना की जानकारी दी जाएगी और आवेदन प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
जिलाधिकारी नैनीताल और अन्य प्रशासनिक अधिकारी शिविरों में आवश्यक सहयोग देंगे। पात्रता तय होने के बाद संबंधित रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में पेश की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद बनभूलपुरा क्षेत्र में पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई है और अब आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।


