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उत्तराखंड…अफसरों की छुट्टियों पर सरकार का सख्त रुख

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उत्तराखंड शासन स्तर से बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने अहम फैसला लेते हुए भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों की छुट्टियों को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब वरिष्ठ अधिकारियों को अर्जित अवकाश (Earned Leave) लेने के लिए केवल विभागीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि शासन से भी अनुमति लेनी होगी। इस फैसले के साथ ही प्रमुख वन संरक्षक हॉफ (PCCF HoFF) के अधिकारों में भी कटौती कर दी गई है।

दरअसल, उत्तराखंड का वन विभाग लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में शासन ने ऑल इंडिया सर्विस के तहत आने वाले IFS अधिकारियों की छुट्टियों की प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित करने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की है। अब वरिष्ठ अधिकारियों के अवकाश प्रस्ताव सीधे शासन को भेजे जाएंगे और अंतिम स्वीकृति भी वहीं से दी जाएगी।

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नए आदेश के अनुसार प्रमुख वन संरक्षक हॉफ (PCCF HoFF), प्रमुख वन संरक्षक (PCCF) और अपर प्रमुख वन संरक्षक (APCCF) स्तर के अधिकारियों को अर्जित अवकाश लेने के लिए शासन की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। यानी इन अधिकारियों के अवकाश प्रस्ताव पहले विभागीय स्तर से गुजरेंगे और उसके बाद शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही मंजूर माने जाएंगे।

इसके साथ ही उप वन संरक्षक (DFO), वन संरक्षक (CF) और मुख्य वन संरक्षक (CCF) स्तर के अधिकारियों के लिए भी अवकाश नियमों में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत इन अधिकारियों को अधिकतम 15 दिन तक का अर्जित अवकाश विभाग के एचओडी यानी प्रमुख वन संरक्षक हॉफ द्वारा स्वीकृत किया जा सकेगा। लेकिन यदि कोई अधिकारी 15 दिन से अधिक का अवकाश लेना चाहता है, तो इसके लिए भी प्रस्ताव शासन के पास भेजना होगा और अंतिम मंजूरी वहीं से दी जाएगी।

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पहले की व्यवस्था में प्रमुख वन संरक्षक हॉफ को विभाग के एचओडी के रूप में काफी व्यापक अधिकार प्राप्त थे। वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को तीन महीने तक का अर्जित अवकाश स्वीकृत कर सकते थे। यानी विभाग के अधिकांश अधिकारियों की छुट्टियों का फैसला विभागीय स्तर पर ही हो जाता था।

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लेकिन अब शासन ने इन अधिकारों में कटौती करते हुए छुट्टियों की स्वीकृति प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में ले लिया है। माना जा रहा है कि इस फैसले के पीछे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति पर बेहतर निगरानी रखने जैसे कारण हो सकते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वन विभाग में अवकाश लेने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सख्त और नियंत्रित हो जाएगी।

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हिल दर्पण डेस्क

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