उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत 10,709 पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में 18 करोड़ 49 लाख रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण श्रमिक राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार का प्रयास है कि श्रमिकों और उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिले। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र श्रमिक परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
धामी ने कहा कि श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच के दौरान जिन लोगों में किसी बीमारी की पहचान हुई है, उनके समुचित उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय किया जाए। उन्होंने श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, परिवारों के पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए।
वर्तमान डीबीटी में प्रसूति एवं प्रसविधा सहायता के 95, मृत्युपरांत सहायता के 177, पुत्री विवाह सहायता के 2,354 और शिक्षा सहायता के 8,083 लाभार्थी शामिल हैं। इस तरह कुल 10,709 श्रमिक लाभार्थियों को सहायता राशि हस्तांतरित की गई।
बैठक में बताया गया कि बोर्ड की ओर से अब तक श्रमिक परिवारों को 33,429 शिक्षण सामग्री किट, 26,674 स्वच्छता सामग्री किट और 23,216 पोषाहार किट वितरित की जा चुकी हैं। कुल मिलाकर 83,319 किट का वितरण हुआ है। वहीं, श्रमिक स्वास्थ्य योजना के तहत 20,527 स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और 2,32,281 स्वास्थ्य परीक्षण किए गए हैं।
प्रस्तुतीकरण में Labour Cess Collection Management System (LCCMS) की प्रगति की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि इस प्रणाली को वर्ष 2025 में ई-गवर्नेंस श्रेणी में SKOCH Gold Award मिला है। भारत सरकार के स्तर पर भी इसकी सराहना की गई और इसे Best Practices Compendium में शामिल किया गया है।
LCCMS के माध्यम से अब तक 21,200 प्रतिष्ठानों का ऑनलाइन पंजीकरण किया गया है। इससे सेस संग्रह में 47.21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस प्रणाली को देशभर में अपनाए जाने योग्य डिजिटल गवर्नेंस मॉडल के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य योजना की प्रगति पर संतोष जताया। बताया गया कि नियमित स्वास्थ्य जांच से श्रमिकों में कुछ गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान करने में मदद मिली है। मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार सम्मेलन में भी इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।
प्रस्तुतीकरण के अनुसार पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड के इस मॉडल को अपने राज्यों में अपनाने में रुचि दिखाई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से श्रमिकों को कार्यस्थल पर ही जांच, परामर्श और रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता के साथ पात्रता सत्यापन और जनपदवार कवरेज की नियमित निगरानी की जाए। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पात्र श्रमिकों को भी योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित किया जाए।
इस अवसर पर राज्य सलाहकार संविदा बोर्ड के अध्यक्ष कैलाश पंत, सतर्कता समिति की अध्यक्ष गीता रावत, उपाध्यक्ष मोहनी पोखरिया, उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. धर बाबू अडांकी, सचिव प्रकाश चंद्र दुम्का सहित श्रम विभाग और बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे।


