उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महिला क्षेत्र पंचायत सदस्य की सदस्यता से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर महिला सदस्य को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता कि उसके पति ने उसकी जगह खुद को क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में प्रस्तुत किया था।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर निवासी निखिलेश घरमी की ओर से दायर विशेष अपील को खारिज करते हुए कहा कि सदस्यता समाप्त करने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि संबंधित महिला सदस्य के स्थान पर उसके पति ने वास्तव में पंचायत सदस्य के अधिकारों और दायित्वों का निर्वहन किया।
अदालत ने कहा कि जब तक पति द्वारा महिला सदस्य की ओर से बैठकों में भाग लेने, उनकी अध्यक्षता करने या सदस्य के कार्यों का वास्तविक रूप से निर्वहन करने का ठोस प्रमाण सामने नहीं आता, तब तक केवल उसके द्वारा खुद को सदस्य के रूप में पेश करने के आधार पर अयोग्यता का प्रावधान लागू नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद महिला क्षेत्र पंचायत सदस्य की सदस्यता बरकरार रहेगी। खंडपीठ ने मामले में एकल पीठ द्वारा दिए गए पूर्व आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए विशेष अपील को खारिज कर दिया।


