उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के सहायक अभियंताओं की सीधी भर्ती और पदोन्नति से नियुक्त अधिकारियों के बीच वरिष्ठता विवाद पर अहम फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों स्रोतों से नियुक्त अधिकारियों की अंतर-से वरिष्ठता रोटा-कोटा व्यवस्था के आधार पर निर्धारित करने को सही माना है। अदालत ने इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।
मामला सहायक अभियंता (ईएंडएम) के वर्ष 2008-09 के भर्ती चक्र से जुड़ा था। उस समय सीधी भर्ती के लिए 50.33 प्रतिशत और पदोन्नति के लिए 49.67 प्रतिशत कोटा निर्धारित था, जो व्यावहारिक रूप से 1:1 अनुपात था। एक नवंबर 2008 को दोनों स्रोतों के लिए रिक्तियां निर्धारित की गई थीं। सीधी भर्ती के 72 और पदोन्नति कोटे के 53 पद चिह्नित किए गए थे। नवंबर 2008 में 11 जूनियर इंजीनियरों को पदोन्नत किया गया, जबकि 30 जून 2009 की डीपीसी की संस्तुति पर 43 और जूनियर इंजीनियर पदोन्नत हुए।
वहीं, सीधी भर्ती के लिए 26 फरवरी 2009 को 68 सहायक अभियंता (ट्रेनी) पदों का विज्ञापन जारी किया गया। चयन प्रक्रिया में देरी के चलते 39 पद ही भरे जा सके और चयनित अधिकारियों ने दिसंबर 2009 से जनवरी 2010 के बीच कार्यभार ग्रहण किया। विवाद इस बात पर था कि इन अधिकारियों की वरिष्ठता नियुक्ति की तिथि से मानी जाए या वर्ष 2008-09 की भर्ती प्रक्रिया में पदोन्नत अधिकारियों के साथ रोटा-कोटा के आधार पर तय की जाए।
हाईकोर्ट ने वरिष्ठता विनियम, 1998 के विनियम 8(3) की व्याख्या करते हुए कहा कि जब सीधी भर्ती और पदोन्नति एक ही चयन प्रक्रिया का हिस्सा हों, तो दोनों स्रोतों से नियुक्त अधिकारियों की वरिष्ठता निर्धारित कोटे के अनुसार चक्रीय क्रम में तय की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीधी भर्ती की प्रक्रिया प्रशासनिक कारणों से बाद में पूरी होने मात्र से अधिकारियों को उनके रोटा-कोटा स्थान से वंचित नहीं किया जा सकता।
इससे पहले यूपीसीएल ने हाई लेवल कमेटी गठित की थी। कमेटी ने 17 अप्रैल 2025 की रिपोर्ट में वर्ष 2009 में नियुक्त सीधी भर्ती अधिकारियों को वर्ष 2008-09 के पदोन्नत अधिकारियों के साथ 1:1 रोटा-कोटा के आधार पर संयुक्त वरिष्ठता सूची में समायोजित करने की सिफारिश की थी। इसके बाद चार जून 2025 को संयुक्त वरिष्ठता सूची जारी की गई।
खंडपीठ ने यूपीसीएल की वरिष्ठता व्यवस्था में कोई त्रुटि नहीं पाई। अदालत ने नौ जून 2025 को जारी अंतिम वरिष्ठता सूची और हाई लेवल कमेटी की 17 अप्रैल 2025 की सिफारिशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायालय ने 16 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाएं खारिज की जाती हैं और लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं होगा।


