उत्तराखंड में एक पिता के रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। अपनी ही 12 वर्षीय नाबालिग सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म के प्रयास और यौन उत्पीड़न के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की विशेष न्यायाधीश कुसुम शानी ने आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता को पांच लाख रुपये प्रतिकर दिए जाने के आदेश जारी किए हैं।
मां के सामने बच्ची ने बताई आपबीती
मामला 7 अगस्त 2023 का है। कैंट थाना क्षेत्र में रहने वाली 12 वर्षीय बच्ची के साथ उसके सौतेले पिता ने दुष्कर्म का प्रयास किया। इसी दौरान बच्ची की मां वहां पहुंच गई। बाद में बच्ची ने मां को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। उसने यह भी खुलासा किया कि आरोपी पहले भी उसके साथ गलत हरकतें कर चुका था। इसके बाद मां की शिकायत पर 9 अगस्त 2023 को पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और 10 अगस्त को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
सात गवाहों के बयान के आधार पर सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष ने बच्ची की बहन को गवाही के लिए बुलाया। सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 और भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) तथा 323 के तहत दोषी करार दिया। हालांकि, अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 506 के आरोप से बरी कर दिया।
20 साल का कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना
30 अक्टूबर 2026 को सजा सुनाते हुए अदालत ने पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, आईपीसी की धारा 323 के तहत छह माह का कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न देने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने के आदेश दिए हैं। आरोपी द्वारा पहले जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
पीड़िता को मिलेगा पांच लाख रुपये प्रतिकर
अदालत ने पीड़िता को राज्य पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने के आदेश भी दिए हैं। इसके लिए आदेश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), देहरादून को भेजा गया है। आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में था। सजा सुनाए जाने के बाद उसे शेष सजा भुगतने के लिए जिला कारागार भेज दिया गया।



