उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम हुए भीषण हादसे में नौ श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य की तलाश जारी है। हादसे में घायल 12 श्रमिकों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है और एक श्रमिक को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
हादसा 13 अगस्त की शाम करीब पौने सात बजे हुआ। उस समय सुरंग में 25 से अधिक श्रमिक काम कर रहे थे। बताया गया कि परियोजना की 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग में करीब 1.8 किलोमीटर भीतर ग्रेविटी प्वाइंट पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक तेज धमाके जैसी आवाज हुई और सुरंग के ऊपरी हिस्से से पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा अंदर आ गया। देखते ही देखते सुरंग में अफरातफरी मच गई और कई श्रमिक मलबे और पानी की चपेट में आ गए।
झारखंड निवासी प्रत्यक्षदर्शी निस्तरा भिंगरा ने जिला अस्पताल में उपचार के दौरान बताया कि हादसे के वक्त सुरंग में सेटेरिंग का काम किया जा रहा था। अचानक तेज आवाज के बाद पानी और मलबे का तेज बहाव आया, जिससे श्रमिक इधर-उधर छिटक गए। उन्होंने बताया कि वह भी पानी और मलबे में बहते हुए सुरंग के बाहर की ओर आए और इस दौरान मलबे में धंसते रहे।
हादसे के बाद एनडीआरएफ समेत अन्य बचाव दलों ने राहत अभियान शुरू किया। एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आलोक जायरा के अनुसार, सुरंग के भीतर पानी, दलदल और ऑक्सीजन की कमी के कारण रात में अभियान को रोकना पड़ा। शुक्रवार सुबह बचाव अभियान दोबारा शुरू किया गया और लापता श्रमिकों की तलाश जारी है।
घायलों में 10 का इलाज जिला अस्पताल गोपेश्वर, एक का श्रीनगर और एक का पीपलकोटी में चल रहा है। हादसे में प्रभावित अधिकांश श्रमिक बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं।
444 मेगावाट क्षमता वाली विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का निर्माण टीएचडीसी-एनटीपीसी की ओर से किया जा रहा है। परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हादसा निर्माणाधीन सुरंग के उस हिस्से में हुआ, जहां पैकिंग का कार्य चल रहा था।


