उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के भीतर हाल ही में पंचायत चुनावों के परिणामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है, खासकर उन विधायकों के बारे में जो इस चुनाव में अपनी पार्टी के लिए अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। यह चुनाव भाजपा के लिए सेमीफाइनल की तरह थे, जिसमें पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के अधिकतर पदों पर जीत हासिल की, लेकिन कई विधानसभाओं में पार्टी को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।
पार्टी ने इस हार को लेकर अब अपने विधायकों के प्रदर्शन का विश्लेषण करना शुरू कर दिया है। पार्टी ने जिन विधायकों को कमजोर माना है, उनकी लिस्ट तैयार की है, और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए ये रिपोर्ट कार्ड अहम साबित हो सकता है। जिन नेताओं ने अपनी विधानसभा क्षेत्रों में कमजोर प्रदर्शन किया, उनका भविष्य अब सवालों के घेरे में है।
उदाहरण के तौर पर, चमोली जिले के विधायक भूपाल राम टम्टा ने जहां अपने जिले में 11 में से 9 सीटें गंवा दीं, वहीं रुद्रप्रयाग जिले की विधायक आशा नौटियाल ने पूरी तरह से हार का सामना किया, जहां उनकी पार्टी की सभी 8 सीटें चली गईं। टिहरी गढ़वाल जिले के विधायक शक्ति लाल शाह और प्रीतम सिंह पंवार ने भी 9 में से 7 सीटें खो दीं। इन हारों के बीच, भाजपा के भीतर विधायकों से हार की वजह पूछी जाएगी, और नए टारगेट दिए जाएंगे।
यहां तक कि मंत्री सतपाल महाराज, जो पौड़ी गढ़वाल जिले से विधायक हैं, ने भी 6 में से 4 सीटें हारने के साथ-साथ सभी ब्लॉक प्रमुख पद भी गंवा दिए। जबकि देहरादून जिले के विधायक बृज भूषण गैरोला और मुन्ना सिंह चौहान का प्रदर्शन और भी निराशाजनक रहा।
चर्चा इस बात को लेकर है कि पार्टी अब इन कमजोर विधायकों का रिपोर्ट कार्ड बनाकर आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उनकी भूमिका पर पुनः विचार कर सकती है। पंचायत चुनावों की हार भाजपा के लिए एक चेतावनी हो सकती है, जो 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में अहम भूमिका निभाएगी।
इन परिणामों ने पार्टी के भीतर सियासी हलचल को बढ़ा दिया है और आने वाले समय में भाजपा के भीतर इन मुद्दों पर गहरे विचार विमर्श की संभावना है।