उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं एसआईआर के प्रदेश प्रभारी तरुण बंसल ने कहा कि एसआईआर निर्वाचन आयोग की निर्धारित नियमावली के तहत चल रही संवैधानिक प्रक्रिया है और इसमें किसी राजनीतिक दल या वर्ग को निशाना नहीं बनाया जा रहा है।
भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में बंसल ने कहा कि एसआईआर के दौरान सामने आई असंगतियों और मानवीय त्रुटियों के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी विधानसभा क्षेत्र में हजारों नोटिस जारी होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि किसी खास वर्ग के मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। पूरी प्रक्रिया की रिपोर्टिंग डिजिटल माध्यम से हो रही है और फॉर्म-6 व फॉर्म-7 समेत सभी प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड उपलब्ध है।
उन्होंने 8.33 लाख मतदाताओं के नाम हटने के दावे को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि यह संख्या हटाए गए नामों की नहीं, बल्कि उन मतदाताओं की है जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी है। इनमें मृतक, स्थानांतरित हो चुके लोग और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नाम वाले मतदाता शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं को फॉर्म-6 के माध्यम से अपना नाम दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।
बंसल ने कहा कि बिहार, असम और पश्चिम बंगाल में भी विपक्ष ने एसआईआर को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन चुनाव परिणाम के बाद यह मुद्दा समाप्त हो गया। उन्होंने कांग्रेस पर जमीनी संगठन की कमी के कारण संवैधानिक प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा का संगठन बूथ स्तर तक सक्रिय है और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे। किसी मतदाता को नोटिस या आपत्ति को लेकर समस्या है तो वह बीएलओ अथवा बीएलए-2 के माध्यम से अपना पक्ष और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है। भाजपा नेता ने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है। उत्तराखंड की सरकार का चुनाव प्रदेश के पात्र मतदाता ही करेंगे और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं रहने दिया जाएगा।


