उत्तराखंड के काशीपुर के महुआखेड़ागंज क्षेत्र में 20 वर्षीय युवती मेहविश की गोली लगने से हुई मौत के मामले में आईटीआई कोतवाली पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल 12 बोर का अवैध तमंचा और एक खोखा कारतूस बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद आरोपियों ने घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने और शव को दूसरी जगह ले जाने का भी प्रयास किया।
पुलिस के मुताबिक, 10 सितंबर को महुआखेड़ागंज क्षेत्र में युवती मेहविश की गोली लगने से मौत की सूचना मिली थी। मामले में मृतका के परिजन फईम हुसैन ने 11 सितंबर को आईटीआई कोतवाली में तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ऊधम सिंह नगर अजय गणपति ने पुलिस अधिकारियों को जल्द घटना का खुलासा करने और आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इसके बाद आईटीआई कोतवाली पुलिस की कई टीमें गठित कर नामजद आरोपियों की तलाश शुरू की गई।
12 सितंबर को पुलिस टीम चौकी पैगा क्षेत्र में आरोपियों की तलाश में जुटी थी। इसी दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने अलीगंज रोड से पीपल गांव जाने वाले रास्ते पर राधास्वामी सत्संग के पास घेराबंदी की। यहां से पुलिस ने साजिद, सबीना और फिजा को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की पूछताछ में साजिद के कब्जे से 12 बोर का अवैध तमंचा और एक खोखा कारतूस बरामद हुआ। पूछताछ में साजिद ने बताया कि उसने तमंचा करीब छह महीने पहले महुआखेड़ा निवासी जमील से लिया था।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि घटना के दौरान साजिद की छोटी बेटी और मेहविश के बीच छीनाझपटी हुई थी। इसी दौरान साजिद की छोटी बेटी के हाथ से गोली चल गई, जो मेहविश को लग गई। गोली लगने से उसकी मौत हो गई।
पुलिस का आरोप है कि घटना के बाद साजिद और उसकी बेटी फिजा ने फर्श पर पड़े खून के धब्बों को मिटाने का प्रयास किया। इसके बाद साजिद ने कथित तौर पर मेहविश के शव को अपने घर से हटाकर उसके घर पहुंचाया। पुलिस इसे घटनास्थल के साक्ष्य बदलने के प्रयास के रूप में देख रही है।
एसएसपी अजय गणपति ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। बरामद तमंचे और कारतूस के साथ घटनास्थल से जुटाए गए अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। मामले में आगे की विवेचना जारी है।


