देशभर में चर्चित बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप मामले में करीब नौ साल बाद न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। सोमवार को विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) ओमप्रकाश वर्मा तृतीय की अदालत ने पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1.81 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह मामला वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आक्रोश का कारण बना था। अदालत के फैसले से पीड़ित परिवार और समाज के संवेदनशील वर्ग को कुछ हद तक न्याय का एहसास हुआ है। हालांकि, सजा के दौरान भी एक दोषी के चेहरे पर पश्चाताप न दिखने और पहले मीडिया के सामने किए गए असंवेदनशील व्यवहार ने लोगों को झकझोर दिया।
29 जुलाई 2016 को नोएडा से शाहजहांपुर जा रहे एक परिवार की कार को बुलंदशहर के कोतवाली देहात क्षेत्र में नेशनल हाईवे-91 पर दोस्तपुर फ्लाईओवर के पास रोक लिया गया था। आरोपियों ने कार सवार तीन पुरुषों को बांधकर परिवार की 14 वर्षीय नाबालिग बेटी और उसकी मां के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस घटना ने सड़क से लेकर संसद तक तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की थीं।
पुलिस ने शुरुआत में 11 आरोपियों को नामजद किया था, बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई। विवेचना के दौरान दो आरोपी मुठभेड़ में मारे गए, तीन के नाम साक्ष्य के अभाव में हटा दिए गए। एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है। सीबीआई ने छह अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिनमें से पांच को दोषी ठहराया गया।
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने 25 गवाह पेश किए और 169 अभियोजन प्रपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। 27 जुलाई 2018 को चार्जशीट दाखिल होने के बाद नियमित सुनवाई हुई।
शनिवार को न्यायालय ने जुबेर उर्फ सुनील उर्फ परवेज, साजिद, धर्मवीर उर्फ राका उर्फ जितेन्द्र, सुनील उर्फ सागर और नरेश उर्फ संदीप उर्फ राहुल को दोषी ठहराया था। सोमवार को सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
नौ साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया यह फैसला न्याय व्यवस्था में भरोसा मजबूत करने वाला माना जा रहा है।


