उत्तराखंड में जमीन खरीद घोटाले को लेकर बड़ा एक्शन सामने आने वाला है। इस मामले में विजिलेंस ने तत्कालीन एसडीएम समेत तीन अफसरों की संलिप्तता पाई है और इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश शासन को भेज दी है। अब शासन स्तर पर विजिलेंस की रिपोर्ट का अध्ययन चल रहा है।
मामला 2024 का है, जब नगर निगम हरिद्वार ने ग्राम सराय में कूड़े के ढेर के पास 2.3070 हेक्टेयर भूमि 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी। घोटाले की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो आईएएस, एक पीसीएस और कुल 12 आरोपियों को निलंबित कर दिया था। विजिलेंस ने मामले की पूरी जांच की और निदेशक विजिलेंस डॉ. वी. मुरुगेशन की ओर से रिपोर्ट शासन को सौंप दी।
जांच में पाया गया कि तहसील हरिद्वार के अधिकारी और कर्मचारी भूमि के हस्तांतरण (परवाना) और धारा-143 जमींदारी विनाश अधिनियम के तहत भू-उपयोग परिवर्तन में लापरवाही और नियमों की अवहेलना कर रहे थे। विजिलेंस ने इसे प्रथम दृष्टया संलिप्तता माना है।
एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो चुकी है। उन्हें आरोपपत्र जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था, जिसमें उन्होंने सभी आरोपों का खंडन किया। अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव को मामले की जांच सौंपी गई थी। सूत्रों के अनुसार, तीनों अफसरों तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह, तहसीलदार प्रियंका रानी और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कमलदास के खिलाफ सरकार सख्त निर्णय लेने की संभावना है, और विभागीय कार्रवाई जल्द की जा सकती है।


