पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार का एक बार फिर गंभीर मामला सामने आया है। यहां मोतीपुर थाने में तैनात एक उप निरीक्षक और हेड कांस्टेबल द्वारा 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगने और वसूलने का मामला उजागर हुआ है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद आईजी देवीपाटन रेंज ने कड़ा एक्शन लेते हुए दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
मामला उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में सामने आया है। जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता निजामुद्दीन पुत्र मुन्ना, निवासी बेगम पुरवा, मटेही कला, थाना मोतीपुर, जनपद बहराइच की बेटी की शादी थी। अपने मकान के सहन में बने गड्ढे को भरने के लिए निजामुद्दीन 7 जनवरी की रात ठेला गाड़ी से डॉक्टर कुनियाघाट से मिट्टी लेकर वापस लौट रहा था। इसी दौरान रात करीब 11 बजे मोतीपुर थाने में तैनात उप निरीक्षक अमरेश गिरी और हेड कांस्टेबल शैलेंद्र यादव ने उसकी ठेला गाड़ी रोक ली।
आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मियों ने उसे थाने ले जाने की धमकी दी और अवैध खनन के मामले में जेल भेजने की बात कहकर 30 हजार रुपये की मांग की। दबाव में आकर पीड़ित ने उधार लेकर 30 हजार रुपये दोनों पुलिसकर्मियों को दे दिए।
पीड़ित ने मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधी हेल्पलाइन पर की, जिसके बाद आईजी देवीपाटन रेंज अमित पाठक के निर्देश पर भ्रष्टाचार निरोधी सेल द्वारा गोपनीय जांच कराई गई। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद क्षेत्राधिकारी मिहींपुरवा स्तर से कराई गई विस्तृत जांच में भी आरोपों की पुष्टि हुई।
जांच में दोषी पाए जाने पर मोतीपुर थाने में तैनात उप निरीक्षक अमरेश गिरी और हेड कांस्टेबल शैलेंद्र यादव को परिक्षेत्रीय कार्यालय के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
आईजी अमित पाठक ने बताया कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। भ्रष्टाचार निरोधी हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में इसी तरह के मामलों में 13 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है।


