उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ज्योलिकोट और आसपास के गांजा, वीरभट्टी, छीना, बेलुवाखान व सरियाताल क्षेत्रों में दूषित पेयजल से जलजनित बीमारियां फैलने के मामले मेंसख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जल संस्थान के महाप्रबंधक और पेयजल निगम के कुमाऊं मंडल के मुख्य अभियंता को 29 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में भी व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित नौ सदस्यीय कमेटी से अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि मामले की जांच और समाधान के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी में जल संस्थान, पेयजल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारी व विशेषज्ञ शामिल हैं। सरकार के अनुसार कमेटी की पहली बैठक बुधवार को होगी। नैनीताल शहर से लिए गए 17 पानी के नमूनों की जांच में पानी मानकों के अनुरूप पाया गया, हालांकि कुछ जल स्रोतों में क्लोरीन की कमी मिली है। सरियाताल सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों के जल स्रोतों के नमूने भी लिए जा रहे हैं।
कोर्ट ने प्रशासन से यह भी जवाब मांगा कि क्षेत्र के ग्राम प्रधानों द्वारा पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायत किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने समय रहते ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की। कोर्ट ने शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी अगली सुनवाई में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार पिछले करीब तीन महीनों से क्षेत्र में डायरिया और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं। याचिका में दो लोगों की मौत और बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने का उल्लेख किया गया है। बेलुवाखान निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट ने इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में संबंधित विभागों की कथित लापरवाही का मुद्दा उठाते हुए प्रभावित लोगों के नि:शुल्क उपचार और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की है।


