उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की है। मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किए जाने की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ मेजर पनिशमेंट की कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के आदेश भी जारी किए गए हैं। संबंधित कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
हरिद्वार नगर निगम ने सराय गांव में कूड़ा निस्तारण केंद्र के विस्तार के लिए करीब 33 बीघा भूमि 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी। जांच में सामने आया कि भूमि का लैंड यूज कृषि से व्यावसायिक किए जाने के बाद उसका सर्किल रेट 6 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़कर 25 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गया, जिससे करोड़ों रुपये के वित्तीय नुकसान की आशंका जताई गई।
विजिलेंस की जांच में भूमि खरीद-बिक्री में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मामले में शामिल अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को मंजूरी दे दी है।
अभियोजन की कार्रवाई जिन लोगों के खिलाफ की जाएगी, उनमें तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारी और भूमि विक्रेता शामिल हैं। उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और जनधन के दुरुपयोग के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।


