संसद की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप ‘पीडीजी’ को हटाए जाने के बाद वीवीआईपी सुरक्षा घेरे में भी बड़े बदलाव की आहट सुनाई पड़ रही है। अभी तक वीआईपी सुरक्षा में ज्यादातर एनएसजी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ व आईटीबीपी के जवान तैनात रहते हैं।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा का दायित्व ‘एसपीजी’ के कंधों पर है। एसपीजी में अधिकांश जवान, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से आते हैं। पांच वर्ष पहले कई अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप ‘एसपीजी’ के पास थी, उनकी सुरक्षा भी सीआरपीएफ को सौंपी गई थी। अब राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) से वीआईपी सुरक्षा की जिम्मेदारी वापस ली जा रही है। संसद की ड्यूटी से मुक्त हुए सीआरपीएफ के पीडीजी दस्ते का दायरा अब बढ़ाया जा सकता है।
लोकसभा चुनाव के बाद एनएसजी की वीआईपी सिक्योरिटी यूनिट, स्पेशल रेंजर ग्रुप (एसआरजी) की ड्यूटी, पूरी तरह से सीआरपीएफ की वीआईपी सिक्योरिटी इकाई को सौंप दी जाएगी। एसएसजी को उसके मूल काम यानी आतंकवाद विरोधी और अपहरण रोधी अभियानों का विशिष्ट दायित्व सौंपा जाएगा। एनएसजी अपने मूल चार्टर और उच्च जोखिम वाले वीआईपी की सुरक्षा के कार्य पर ध्यान केंद्रित करेगी।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, एनएसजी को उसके मूल कार्य में लगाने के लिए कई वर्षों से प्रयास चल रहा था। अमित शाह द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद इस प्रपोजल पर विचार शुरू हुआ था। 2019 में ही पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और गांधी परिवार के सदस्यों की सुरक्षा में तैनात ‘एसपीजी’ कवर वापस ले लिया गया था। उसी वक्त इस बात पर भी विचार किया जाने लगा कि एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो को भी वीवीआईपी सुरक्षा से मुक्त कर दिया जाए। जिन वीवीआईपी की सुरक्षा, एनएसजी को सौंपी गई थी, उसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के हवाले कर दिया जाए। इस मामले में कई उच्चस्तरीय अधिकारियों से रिपोर्ट ली गई। गत वर्ष 13 दिसंबर को संसद परिसर की सुरक्षा में हुई चूक के बाद वहां से पीडीजी को हटाने की कवायद शुरू कर दी गई।