उत्तराखंड में प्रमोटी पीसीएस अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही वरिष्ठता की मांग पर आखिरकार शासन ने मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने चार अधिकारियों को एक अक्टूबर 2007 से नियमित पदोन्नति और वरिष्ठता का लाभ देने संबंधी शासनादेश जारी कर दिया है। इससे चंद्र सिंह मार्तोलिया, उत्तम सिंह चौहान, हरवीर सिंह और जगदीश चंद्र कांडपाल को अब वर्ष 2010 के बजाय वर्ष 2007 से वरिष्ठता और अन्य सेवा संबंधी लाभ मिल सकेंगे।
दरअसल, प्रदेश में सीधी भर्ती और पदोन्नति के माध्यम से पीसीएस बने अधिकारियों के बीच वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। प्रमोटी पीसीएस अधिकारी वर्ष 2007 की रिक्तियों के सापेक्ष अपनी वरिष्ठता निर्धारित करने की मांग कर रहे थे, जबकि सीधी भर्ती के अधिकारी इसका विरोध कर रहे थे। मामला पहले नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचा, जहां फैसला प्रमोटी अधिकारियों के पक्ष में आया। इसके बाद सरकार और सीधी भर्ती के पीसीएस अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली और याचिका खारिज हो गई।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में अक्टूबर 2007 से वरिष्ठता का लाभ देने की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन के कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने चयन वर्ष 2007-08 की रिक्तियों के सापेक्ष चारों अधिकारियों को एक अक्टूबर 2007 से डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियमित पदोन्नति का लाभ देने का आदेश जारी किया है।
शासनादेश में वरिष्ठता के साथ अन्य सेवा लाभों का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत नियमानुसार पांच, 12 और 14 वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने पर क्रमशः वरिष्ठ वेतनमान, चयन श्रेणी और विशेष श्रेणी वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा संशोधित तिथि के आधार पर बकाया धनराशि के भुगतान और आईएएस संवर्ग में पदोन्नति के लिए रिक्तियों के सापेक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस फैसले से चारों प्रमोटी पीसीएस अधिकारियों की वरिष्ठता और सेवा संबंधी लाभों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। लंबे समय से अदालतों में चल रहे विवाद के बाद शासनादेश जारी होने से अब उनकी सेवा संबंधी आगे की प्रक्रिया का रास्ता भी साफ हो गया है।



