हल्द्वानी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर गुरुवार को हल्द्वानी महानगर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एचएमटी फैक्ट्री रानीबाग के गेट नंबर-2 पर प्रदेश सरकार की कथित निजीकरण नीति के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में काम कर रही है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने ‘हमारी भूमि, हमारा अधिकार, कांग्रेस की यही है पुकार’ का नारा लगाते हुए प्रदेश की संपत्तियों की रक्षा का संकल्प लिया।
विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार है, लेकिन सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की शुरुआत इसी क्षेत्र से की जा रही है। उन्होंने कहा कि एचएमटी रानीबाग का घड़ी कारखाना कभी हजारों परिवारों की आजीविका का आधार था। कांग्रेस की मंशा यहां नए उद्योग स्थापित कर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की थी, जबकि वर्तमान सरकार इस जमीन पर होटल स्थापित करने की तैयारी कर रही है। उनके अनुसार नैनीताल रोपवे के लिए पांच एकड़ जमीन छोड़कर शेष 53 एकड़ भूमि यूआईआईडीबी के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने रानीबाग, ज्योलीकोट, रातीघाट और रामगढ़ के ऐतिहासिक निरीक्षण भवनों, पटवाडांगर की जमीन तथा नैनीताल के सीवर प्लांट से जुड़े निर्णयों पर भी सवाल उठाए।
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट गोविंद सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रदेश की जमीन और प्राकृतिक संसाधन जनता की अमूल्य धरोहर हैं। जब युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, भूमिहीन परिवार आवास की मांग कर रहे हैं और विकास कार्यों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है, तो सरकार इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि निजी संस्थानों को क्यों सौंप रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल ने भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों में स्थानीय युवाओं के रोजगार, किसानों के हित और भूमिहीन परिवारों की जरूरतों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने की बात कही।
कांग्रेस नेताओं ने ऋषिकेश के आईडीपीएल की 633 एकड़, डाकपत्थर की करीब 190 एकड़, मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट की 142 एकड़ और किच्छा के प्राग फार्म की लगभग 1,938 एकड़ जमीन का उल्लेख करते हुए इन संपत्तियों का इस्तेमाल जनहित, रोजगार सृजन और प्रदेश के विकास के लिए करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि एचएमटी की जमीन पर होटल के बजाय रोजगार देने वाले उद्योग स्थापित किए जाएं, कुमाऊं के ऐतिहासिक निरीक्षण भवनों को निजीकरण की प्रक्रिया से बाहर रखा जाए तथा प्राग फार्म की जमीन पर किसानों, भूमिहीनों और स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
धरने की अध्यक्षता एडवोकेट गोविंद सिंह बिष्ट ने की, जबकि संचालन एचएमटी के पूर्व यूनियन नेता गिरीश पांडे ने किया। प्रदर्शन में हेमंत बगड़वाल, हरीश पनेरू, भोला दत्त भट्ट, गुरप्रीत प्रिंस, डॉ. मयंक भट्ट, मलय बिष्ट, नरेश अग्रवाल, मोहन बिष्ट, जाकिर हुसैन, जीवन कार्की, सालीम सिद्दीकी, हेमंत साहू, शोभा बिष्ट, मधु सांगुड़ी, गीता बहुगुणा, साइमा सिद्दीकी, भगवती जोशी, रेणु तोमर, नीमा भट्ट, पुष्पा नेगी, प्रकाश पांडे, वीरेंद्र चौहान, हेम जोशी, जगमोहन बगड़वाल, किरण माहरा, दीप पाठक, गिरीश पांडे, महेंद्र कुमार, सुमित कुमार, ज्ञान सिंह थापा, राजू रावत, संजय रावत, जगमोहन चिलवाल, हर्ष मनकोटी, सूरज बिष्ट, पार्षद हेमंत शर्मा, एडवोकेट धर्मवीर, सन्नी सेठी, शंकर कोहली, कौशलेंद्र भट्ट, मनोज भट्ट, योगेश कबड़वाल, साबिल अहमद, मोहम्मद अरबाज, हबीबुर्रहमान कोहली, एडवोकेट कुंदन बिष्ट, सुहैल सिद्दीकी, दिवेश तिवारी, मोहम्मद गुफरान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश की जमीन, जल, जंगल और ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।



