आज का दिन भोलेनाथ के भक्तों के लिए बेहद खास है, क्योंकि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवालयों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। देर रात से ही भक्त शिव के जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं। बड़े-बुजुर्ग, युवा, बच्चे सभी भोलेनाथ के जयकारों के साथ महादेव के दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
महाशिवरात्रि हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव ने गृहस्थ जीवन को अपनाया था।
इस दिन विधिपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि का पूरा दिन शिव पूजा के लिए समर्पित रहता है, लेकिन शुभ मुहूर्त में की गई पूजा विशेष फल देती है। शिव कालों के महाकाल हैं, इसलिए उनकी पूजा पर भद्रा और पंचक जैसे अशुभ काल का कोई असर नहीं पड़ता। यही कारण है कि महाशिवरात्रि के दिन भद्रा होने के बावजूद पूरी रात शिव पूजा निर्बाध रूप से की जा सकती है।
महाशिवरात्रि शब्द का अर्थ है “भगवान शिव की रात्रि”, जिसमें ‘महा’ का अर्थ है ‘महान’ और ‘शिवरात्रि’ का अर्थ है ‘भगवान शिव की रात्रि’। धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसीलिए रातभर जागकर शिव और उनकी शक्ति माता पार्वती की आराधना करने से भक्तों पर दोनों की विशेष कृपा होती है।
महाशिवरात्रि का पर्व भक्तों के जीवन में विशेष महत्व रखता है, और इस दिन की पूजा से मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।