उत्तराखंड में दो नाबालिग छात्राओं के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में पिथौरागढ़ की विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने फैसला सुनाते हुए दोषी इरफान पुत्र फिदा हुसैन, निवासी बरेली (उत्तर प्रदेश), को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर कुल 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। साथ ही राज्य सरकार को दोनों पीड़िताओं को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक फरवरी 2024 को धारचूला क्षेत्र की दो नाबालिग छात्राएं स्कूल गई थीं, लेकिन घर वापस नहीं लौटीं। तीन फरवरी को परिजनों ने धारचूला कोतवाली में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि इरफान और उसका एक किशोर साथी छात्राओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपने साथ ले गए थे। आरोप था कि इसके बाद दोनों छात्राओं के साथ जबरन दुष्कर्म किया गया।
पुलिस ने तलाश के दौरान दोनों छात्राओं को बरेली बस अड्डे से बरामद किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले में दूसरे आरोपी को किशोर घोषित किए जाने के बाद उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई।
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक प्रेम सिंह भंडारी ने अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में 14 गवाह पेश किए। सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इरफान को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने दोनों पीड़िताओं को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने के भी आदेश दिए हैं।



