उत्तराखंड में अर्धकुंभ के दौरान हरिद्वार के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हाईटेक निगरानी व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) ने एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 82.13 लाख रुपये की अनुमानित लागत तय की है। इन कैमरों के जरिए घाटों पर भीड़ की स्थिति से लेकर प्रतिबंधित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही तक पर नजर रखी जा सकेगी।
गंगा स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर्वों और विशेष स्नान के दौरान काफी बढ़ जाती है। अर्धकुंभ में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। एआई तकनीक से लैस कैमरे भीड़ का घनत्व, कतारों की लंबाई और अधिक भीड़ वाले स्थानों की पहचान करने में सक्षम होंगे। इसके साथ ही चेहरों, लोगों और वाहनों की पहचान तथा निर्धारित सीमा पार करने जैसी गतिविधियों का भी पता लगाया जा सकेगा।
गंगा घाटों पर फिसलन, तेज बहाव और भीड़ के दबाव के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ऐसे में कैमरों से मिलने वाले दृश्यों के विश्लेषण के जरिए संवेदनशील स्थानों की स्थिति समझने और जरूरत पड़ने पर संबंधित सुरक्षा टीमों को मौके पर भेजने में मदद मिल सकती है। किसी व्यक्ति के लापता होने या परिवार से बिछड़ने की स्थिति में भी निगरानी फुटेज उपयोगी साबित हो सकती है।
योजना में दो श्रेणियों के कैमरे लगाने का प्रावधान है। पहली श्रेणी में आउटडोर बुलेट कैमरे शामिल हैं, जिनमें रात में निगरानी के लिए 50 से 80 मीटर तक की इन्फ्रारेड क्षमता होगी। इनमें मोटर नियंत्रित लेंस और मेमोरी कार्ड की सुविधा भी दी जाएगी। कैमरे धूल और पानी से सुरक्षा के निर्धारित मानकों के अनुरूप होंगे।
दूसरी श्रेणी में पीटीजेड कैमरे लगाए जाने का प्रस्ताव है। इन्हें जरूरत के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में घुमाया जा सकेगा। इनमें 33 गुना ऑप्टिकल जूम और 200 मीटर तक की इन्फ्रारेड निगरानी क्षमता होगी। इससे दूर स्थित स्थानों की गतिविधियों को करीब से देखने के साथ रात में भी निगरानी की जा सकेगी।
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य अर्धकुंभ के दौरान घाटों पर भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाना और आपात परिस्थितियों में समय रहते कार्रवाई में मदद करना है। एआई आधारित कैमरों के जरिए मिलने वाली जानकारी से निगरानी कर्मचारियों को घाटों की स्थिति का आकलन करने और सुरक्षा व्यवस्था को जरूरत के अनुसार संचालित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।



